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Tuesday, 29 December 2015

सरकारी नौकरी के लिए नहीं देना होगा इंटरव्यू, 1 जनवरी से लागू

केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विभिन्न पदों पर नियुक्ति में अब इंटरव्यू नहीं होगा। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने मंगलवार को निचले स्तर के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया से इंटरव्यू हटाने का आदेश जारी कर दिया।

इस साल अक्तूबर में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में समूह बी (गैर राजपत्रित), सी और ऐसे ही समकक्ष पदों पर नियुक्त में इंटरव्यू खत्म करने की घोषणा की थी। यानी अब केवल समूह ए और बी (राजपत्रित) पदों के लिए इंटरव्यू होगा।

कार्मिक विभाग के आदेश के मुताबिक मंत्रालय नियुक्ति प्रक्रिया में अपने हिसाब से शारीरिक या कौशल टेस्ट को बनाए रख सकते हैं। हालांकि, इन टेस्ट में केवल पास करना अनिवार्य होगा। इन टेस्ट के नंबर के आधार पर उम्मीदवार का समग्र मूल्यांकन नहीं किया जाएगा।सभी मंत्रालयों को भेजे गए आदेश में कहा गया है कि 31 दिसंबर 2015 तक इंटरव्यू खत्म करने की अवधि का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। एक जनवरी 2016 से निचले स्तर के पदों पर नियुक्ति के लिए इंटरव्यू नहीं होगा।

इसमें कहा गया है कि भविष्य में नौकरियों के विज्ञापन में भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू का जिक्र नहीं होना चाहिए। अगर किसी खास पद पर भर्ती के लिए कोई मंत्रालय या विभाग इंटरव्यू जारी रखना चाहता है तो उसे इस बारे में एक विस्तृत प्रस्ताव प्रभारी मंत्री की मंजूरी के साथ कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को भेजना होगा।

इस बारे में कार्मिक मंत्रालय ने सात जनवरी तक सभी मंत्रालयों और विभागों से रिपोर्ट मांगी है। आदेश में कहा गया है कि जिस पद के लिए इंटरव्यू जारी रखने की मांग की जाएगी, उस बारे में भेजे जाने वाले पत्र में पद का नाम और उनकी संख्या आदि की विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसी तरह सार्वजनिक उपक्रम विभाग ने सभी मंत्रालयों से कहा है कि वे अपने अधीन के उपक्रमों में गैर कार्यकारी (नॉन एग्जीक्यूटिव) पदों पर नियुक्ति के लिए इसी प्रक्रिया को अपनाने को कहा है।

पुलिसकर्मियों की भर्ती अगले माह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी 18 जनवरी से कांस्टेबल के 34716 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आरम्भ की जायेगी।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के प्रवक्ता के अनुसार इस भर्ती में पुरुष आरक्षी-232००, पीएसी आरक्षी -5716 एवं महिला आरक्षी-58०० के पदों के लिए की जा रही है। पुरूष और महिला अभ्यर्थियों की भर्ती अलग-अलग की जायेगी। उन्होंने बताया कि पुरूष अभ्यर्थी 18 जनवरी से आन लाइन आवेदन कर सकते हैं , जबकि महिला अभ्यर्थी 25 जनवरी से आन लाइन आवेदन कर सकेगी। आवेदन करने की प्रक्रिया एक माह तक चलेगी।

 इस बार पहली बार अभ्यर्थियों को नेट बैंकिंग, डेविट कार्ड, क्रेडिट कार्ड के माध्यम से आन-लाइन पमेन्ट करने का अवसर प्रदान किया गया है। जिन अभ्यर्थियों के पास यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, वह स्टेट बैंक आफ इण्डिया के किसी भी शाखा में ई-चालान के माध्यम से फीस जमा कर सकते हैं। नई नियमावली के अनुसार अभ्यर्थियों का चयन कक्षा 1०वीं एवं 12वीं में प्राप्त अंकों एवं दौड़ के प्राप्त अंकों के आधार पर किया जायेगा। भर्ती प्रक्रिया में कोई इण्टरव्यू नहीं होगा। दसवीं के बोर्ड परीक्षा के आधार पर अधिकतम 1०० अंक एवं 12वीं के बोर्ड परीक्षा के आधार पर अधिकतम 2०० अंक प्रदान किये जायेंगे। इस प्रकार अधिकतम 3०० अंकों के आधार पर श्रेष्ठता सूची बनाये जायेगी एवं श्रेष्ठताक्रम में प्रथम 15 गुना अभ्यर्थियों को दौड और शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया जायेगा।

इस वजह से निकाले गए ये 80 आईआईटी स्टूडेंट्स

आईआईटी रुड़की में प्रोग्राम से टर्मिनेट स्टूडेंटों का मामला अभी शांत ही हुआ था कि आईआईटी कानपुर ने भी अंडर ग्रेजुएट (यूजी), पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) और रिसर्च के करीब 80 स्टूडेंटों को प्रोग्राम से टर्मिनेट (संस्थान से निष्कासित) कर दिया है। इन सबके पास 31 दिसंबर तक मर्सी अपील का मौका है।

जो स्टूडेंट मर्सी अपील करेंगे, उनके आवेदन का अध्ययन पहली जनवरी को आईआईटी की सीनेट करेगी। देखेगी कि किस स्टूडेंट को पढ़ने की अनुमति दी जा सकती है। 

प्रोग्राम से टर्मिनेशन की स्थिति में एक सेमेस्टर (छह महीने) की पढ़ाई ब्रेक हो जाती है। इसके बाद फिर मर्सी अपील की मौका मिलता है। अपील मान ली गई तो पढ़ाई की जा सकेगी वर्ना स्टूडेंट को बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा।आईआईटी कानपुर ने कम क्यूमलेटिव परफारमेंस इंडेक्स (सीपीआई) वाले बीटेक, एमटेक, बीटेक-एमटेक ड्यूल डिग्री प्रोग्राम, बीएस, बीएस-एमएस ड्यूल डिग्री प्रोग्राम, एमएससी, एमडैस और एमबीए के 80 स्टूडेंटों को प्रोग्राम से टर्मिनेट कर दिया है। 

अंडर ग्रेजुएट स्टूडेंटों की सीपीआई चार से कम आई है। सालाना के 10 कोर्स भी नहीं पास कर सके हैं। इसी तरह पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंटों की सीपीआई पांच से कम मिली है। सारे कोर्स नहीं पास किए जा सके हैं।

आईआईटी रुड़की के 72 छात्र चले गए थे हाईकोर्ट

आईआईटी रुड़की के प्रोग्राम से टर्मिनेट 72 स्टूडेंटों का मामला खूब गरमाया था। स्टूडेंटों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और धरना-प्रदर्शन भी किया था। बाद में सीनेट ने उन्हें दोबारा पढ़ाई का मौका दिया।

Monday, 28 December 2015

ओबामा केयर की तरह लागू होगा सीएम हेल्थ केयर

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चुनावी तरकश में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई लुभावने तीर नजर आएंगे। इनमें किसानों और आम लोगों को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने वाले दो नए प्रस्ताव तैयार हैं।

पहली, किसान से लेकर गरीब-गुरबा तक में जीवन कीसुरक्षा का भाव पैदा करने वाली ‘मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना’ है। इसमें किसान हो या आम आदमी, दुर्घटना होने पर इलाज, मृत्यु होने पर परिवारीजनों को मुआवजा और अपंग होने पर कृत्रिम अंग लगवाने का बंदोबस्त किया जा रहा है।

दूसरा, समाजवादी पेंशन के लाभार्थियों से लेकर समस्त बीपीएल परिवारों को ‘ओबामा केयर’ की तरह ‘सीएम हेल्थ केयर’ उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इसके लिए ‘समाजवादी स्वास्थ्य बीमा योजना’ का तोहफा मिलेगा। इन दोनों योजनाओं का फायदा सूबे के करीब 22.5 करोड़ से ज्यादा लोग ले सकेंगे।शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रदेश सरकार की लैपटॉप व कन्या विद्याधन योजना युवाओं को आकर्षित करने वाली देश की सबसे हिट स्कीम साबित हो चुकी है। इसी तरह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों में अगर कोई कुछ सबसे पहले गिनाएगा तो वह आम लोगों को सीधा फायदा पहुंचाने वाली सामाजिक सुरक्षा वाली योजनाएं हैं।

इसी तरह अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से अमीरिकियों को दी गई हेल्थ केयर की सुविधा को भी काफी चर्चा मिली है। प्रदेश सरकार 2017 के विधानसभा चुनाव में जाने से पहले लोगों को सीधे लाभ देने वाली ऐसी कई योजनाओं पर काम कर रही है।

इसके तहत संस्थागत वित्त एवं बीमा विभाग ने कृषक दुर्घटना बीमा योजना के स्थान पर मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना का खाका तैयार किया है तो स्वास्थ्य विभाग समाजवादी स्वास्थ्य बीमा योजना तैयार कर रहा है। इसे जल्द से जल्द कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की योजना है।

वित्त वर्ष 2016-17 के बजट में इन योजनाओं के एलान की तैयारी है। इन दोनों योजनाओं को मिलाकर करीब 20.5 करोड़ लोग फायदा पाएंगे। सरकारी खजाने से चलने वाली इतनी बड़े आकार वाली ऐसी किसी सामाजिक सुरक्षा योजना की मिशाल नहीं मिलती।