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Thursday, 31 December 2015

शिवपाल के मंच से गिरफ्तार हुए थे तोताराम

‘मैं कहां गिरफ्तार हुआ हूं, मैं तो यहां घूमने आया हूं।’ गिरफ्तारी के बाद थाना कोतवाली में ये बेबाक टिप्पणी थी पैकफेड चेयरमैन तोताराम यादव की। गिरफ्तारी और रिहाई के तीन घंटे तक चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद उनकी टिप्पणी सही भी साबित हुई और चिकित्सीय आधार पर उन्हें थाने से जमानत मिल गई।

सुदिति ग्लोबल एकेडमी के कार्यक्रम के दौरान जो सपा कार्यकर्ता उनके इर्द गिर्द नजर आ रहे थे, वह गिरफ्तार होते ही किनारा कर गए। थाने में भी कोई उनका हालचाल जानने नहीं पहुंचा। 

सभी को लग रहा था कि यह सब कुछ पार्टी हाईकमान के इशारे पर हो रहा है। जिस तरह से गिरफ्तारी हुई ये कयास अनायास भी नहीं थे। तीन माह पहले जिला पंचायत चुनाव में रायपुर गांव के बूथ पर कब्जे का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह हाईकोर्ट भी गए। कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे। तोताराम खुले आम जिले में घूम रहे थे, सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे थे, लेकिन पुलिस उन पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। 

बुधवार को गिरफ्तारी हुई भी तो ऐसे मौके पर जब वह कुछ देर पहले प्रदेश सरकार में कद्दावर मंत्री शिवपाल यादव और सांसद तेजप्रताप सिंह यादव के साथ मंच पर मौजूद थे। 

शिवपाल यादव और तेजप्रताप सिंह यादव जाते ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोतवाली लाया गया। यहां उन्होंने मीडिया से कहा भी कि वह गिरफ्तार नहीं हुए है, बल्कि यहां सिर्फ घूमने आए है। अब चर्चा शुरू हो गई कि ये सब कुछ तो पहले से ही तय था।

Wednesday, 30 December 2015

इलाहाबाद हाईकोर्ट नहीं है पर्याप्त, प्रदेश को नई बेंच की दरकार

लॉ कमिशन की 120 वीं  रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर 10 लाख की जनसंख्या पर कम से कम 50 जजों की न्युक्ति की शिफारिश की गई थी। लेकिन 20 करोड़ 42 लाख की जनसंख्या वाले उत्तर प्रदेश के पास केवल 160 जज ही मौजूद हैं, जिससे वर्षों से पड़े लंबित मामलों का निपटारा नही हो पा रहा है। वहीं ये एक तरह से लॉ कमिशन की रिपोर्ट का उल्लंघन भी है। लॉ कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में लगभग 225 जज होने चाहिए।

लेकिन एक हकीकत ये भी है कि अगर इतने सारे जजों की न्युक्ति कर भी ली गई तो शायद इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच में जजों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न हो सके। हांलाकि पिछले काफी लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अलग हाईकोर्ट बेंच की मांग की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो ये पश्चिमी यूपी के लोगों और जजों के लिए भी सहूलियत होगी। लेकिन पश्चिमी यूपी लगातार राजनीतिक भेदभाव का शिकार हो रही है।

जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधीन 160 जज होने के बावजूद केवल एक खंडपीठ की व्यवस्था लखनऊ में की गई है। जबकि महाराष्ट्र में 40 जजों के लिए तीन हाईकोर्ट की बेंच की व्यवस्था हैं। वहीं राजस्थान में 42 जजों के लिए हाईकोर्ट के साथ ही दो हाईकोर्ट की बेंच इंदौर और ग्वालियर में कार्यरत है। वहीं इस मामले में पूर्वोत्तर के राज्यो की हालत भी उत्तर प्रदेश से ठीक है। पुर्वोत्तर राज्यों के लिए असम राज्य के गुवाहाटी में हाईकोर्ट की व्यवस्था की गयी है, जबकि दो खंडपीठ अगरतला और शिलांग में हैं। वहीं बैंगलुरु हाईकोर्ट की तीन खंडपीठ हुबली, धारवाड और गुलबर्गा में है। 

20 करोड़ की आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लिए मात्र एक खंडपीठ की व्यवस्था लखनऊ में की गई है। उत्तर प्रदेश का इलाहाबाद हाईकोर्ट लंबित पड़े मामलों की भरमार है फिर प्रदेश की सरकार नई हाईकोर्ट बेंच बनाने की मांग को गैरजरूरी करार दे रही है। हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी है। सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 5 हजार न्यायाधीशों की कमी है। हालात ये हैं कि देश में 1600 केस पर सिर्फ एक जज की न्युक्ति है। वहीं 20 लाख लोगों को 10 साल से न्याय नहीं मिला है। अदालतों में लंबित मामलों की यह सबसे बड़ी वजह है।

गौरतलब है कि 2009 में 18वें विधि आयोग की 230वीं रिपोर्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अलग खंडपीठ बनाने का जोर दिया गया था। इसके साथ ही वर्ष 1980 में जस्टिस जसवंत सिंह कमीशन की रिपोर्ट में भी क्षेत्र की जनसंख्या और दूरी को आधार बनाकर नई हाईकोर्ट बेंच की मांग को जायाज करार दिया गया था। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट में 15 लाख मामले लंबित पड़े हैं। इन 15 लाख लंबित मामलों में अकेले पश्चिमी यूपी के 57 फीसदी मामले हैं। कई बार ये लंबित पड़े मामले इतने लंबे खिंच जाते हैं कि लोगों की पूरी उम्र गुजर जाती है। लेकिन लोगों को इंसाफ नहीं मिलता है।

खुशखबरीः नए साल में मेट्रो में होंगी 300 पदों पर भर्तियां

नए साल में नौकरियों की सौगात भी मिलेगी। मेट्रो ट्रेन के लिए 300 पदों पर भर्तियां होंगी। इनमें 258 पदों पर खुली भर्ती होगी जबकि 42 पदों पर मेट्रो से अनुभवी अधिकारी-कर्मचारी रखे जाएंगे। 

भर्तियां कंट्रोलर, चीफ कंट्रोलर, सिग्नलिंग, इलेक्ट्रोमैकेनिकल के पदों पर होगी। एलएमआरसी की बोर्ड मीटिंग में भर्तियों को हरी झंडी दे दी है। 

लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की दूसरी वार्षिक आम सभा (एजीएम) में कुछ नौकरियां सीधे साक्षात्कार के जरिये लिये जाने को लेकर अनुमोदन मिल गया।एलएमआरसी के चेयरमैन और मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में आयोजित की गई इस बैठक के मुख्य एजेंडे के तहत एलएमआरसी का वार्षिक लेखा जोखा भी पेश किया गया।

42 कर्मचारी रनिंग मेट्रो प्रोजेक्ट से सीधे साक्षात्कार के जरिये लिए जाएंगे। ये प्रशिक्षत स्टाफ होगा। वहीं अन्य पदों पर टाटा कंसल्टेंसी के जरिये लिखित परीक्षा के आधार पर भर्ती किए जाएंगे। 

परीक्षा से जो कर्मचारी भर्ती होंगे उन्हें भर्ती किए गए अनुभवी कर्मी अप्रैल से लेकर अक्तूबर-2016 तक प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद कर्मियों को पहले 8.50 किमी के स्टेशनों पर तैनाती दे दी जाएगी।

Tuesday, 29 December 2015

लखनऊ में अप्रैल से तीन गुना बढ़ जाएगा ये टैक्स

राजधानी वासियों को अप्रैल से तीन गुना तक वाटर टैक्स चुकाना होगा। तीन साल से जलकल के जिस प्रस्ताव को नगर निगम सदन पास नहीं कर रहा था, शासन ने उसे मंगलवार को हरी झंडी दे दी। 

अभी सबसे छोटे मकान का वाटर टैक्स सालाना 441 रुपये आता है लेकिन अप्रैल में इसका करीब तीन गुना यानी 1350 रुपये चुकाना होगा। हालांकि वाटर मीटर लगाने पर कोई फैसला नहीं हुआ।

केंद्र सरकार की जेएनएनयूआरएम योजना आने के बाद 2012 में जलकल विभाग ने वाटर टैक्स की दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया था। इसे मंजूरी के लिए कई बार नगर निगम सदन में पेश किया गया, मगर हर बार यह प्रस्ताव अटक गया। 

वाटर टैक्स की वसूली, पेयजल उत्पादन और आपूर्ति में आ रहे खर्च का हवाला देते हुए जलकल महाप्रबंधक व नगर आयुक्त ने सदन में कई बार यह कहा कि वाटर टैक्स की दरें बढ़ाई नहीं गईं तो पेयजल व्यवस्था का रखरखाव मुश्किल हो जाएगा।जलकल के वित्त नियंत्रक एके गुप्ता कहते हैं कि इस समय एक किलो लीटर पेयजल के उत्पादन पर 9.36 रुपये का खर्च आता है। जबकि उपभोक्ता से 2.45 रुपये प्रति किलो लीटर ही लिया जाता है। यह दर करीब 15 साल पुरानी है।

पेयजल उत्पादन खर्च और टैक्स वसूली को देखते हुए दरों का बढ़ाया जाना जरूरी है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में पेयजल योजनाएं टैक्स वसूली से होने वाली आय से ही चलती हैं। यहां पर टैक्स की वसूली कम है जबकि खर्च ज्यादा। परीक्षण के बाद दरों में बढ़ोतरी का आदेश जारी होगा।
श्रीप्रकाश सिंह, सचिव नगर विकास

जलकल विभाग की वाटर टैक्स दरें पिछले डेढ़ दशक से नहीं बढ़ी हैं। इससे विभाग को चलाना मुश्किल हो गया है। यदि टैक्स नहीं बढ़ेगा तो जो नई योजनाएं जेएनएनयूआरएम में बनी हैं, उनका रखरखाव कैसे करेंगे। नई दरें नए वित्तीय वर्ष से लागू की जाएंगी।
राजीव वाजपेई, महाप्रबंधक जलकल